शरद ऋतु में स्वास्थ्य: हवादार, शुष्क वात ऋतु में स्थिर कैसे रहें
अंग्रेजी में
शरद ऋतु वात की ऋतु क्यों है
शरद ऋतु सूखी, हल्की, ठंडी, हवादार और रूखी होती है। पेड़ों से पत्ते गिरते हैं और हवा सूखी हो जाती है। ये सब वात के गुण हैं। इस समय कई लोगों को रूखी त्वचा, फटे होंठ, गैस, कब्ज़, जोड़ों में अकड़न, चिंता और नींद की कमी महसूस होती है।
शरद का मुख्य नियम: गर्म रहें, तेल लगाएँ, स्थिर रहें।
शरद की सुबह की दिनचर्या
- हो सके तो सुबह 5 बजे के आसपास उठें। सुबह का समय शांत और नीरव होता है।
- हल्का योग करें, जैसे सूर्य नमस्कार, आगे झुकने वाले आसन, मरोड़ और वज्रासन, फिर शवासन में आराम करें।
- अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें और 10 से 15 मिनट ध्यान करें।
- नहाने से पहले पूरे शरीर पर गुनगुने तिल के तेल से मालिश करें, फिर गुनगुने पानी से नहाएँ। तिल का तेल गर्माहट और गहरी स्थिरता देता है।
शरद का भोजन
खूब खाएँ
- गर्म, नरम, नम भोजन: ओट्स दलिया, चावल की खीर, उपमा, खिचड़ी
- चपाती, बासमती चावल, मूँग दाल और अच्छी तरह पकी सब्ज़ियाँ
- नरम सूप और स्टू, एक चम्मच घी के साथ
इनसे बचें
- कच्चा सलाद और ठंडा, सूखा भोजन
- उपवास: इससे शरीर बहुत हल्का और खाली हो जाता है और वात बिगड़ता है
- रात के खाने के बाद चाय या कॉफ़ी
शरद की आरामदायक चाय
- जीरा-धनिया-सौंफ़ की चाय: जीरा, धनिया और सौंफ़ बराबर मात्रा में पानी में उबालें। पाचन के लिए बहुत अच्छी।
- गर्माहट वाली चाय: सोंठ, दालचीनी और लौंग।
शरद में जीवनशैली
- गर्म कपड़े पहनें। हवा वाले दिन सिर और कान ढकें।
- लाल, पीले और नारंगी जैसे गर्म रंग पहनें।
- बहुत तेज़ व्यायाम से बचें, खासकर वात प्रकृति वाले।
- तेज़ शोर, तेज़ संगीत, तेज़ गाड़ी चलाने और ठंडी हवा से बचें।
- वात लोगों के लिए दोपहर की छोटी झपकी ठीक है।
- रात 10 बजे तक सो जाएँ।
सोने से पहले सबसे अच्छा पेय
एक कप दूध उबालें, थोड़ा ठंडा होने दें, और उसमें चुटकी भर सोंठ, इलायची और जायफल डालें। यह गर्माहट, सुकून और प्राकृतिक नींद देता है।
शरद की पारंपरिक जड़ी-बूटियाँ
आयुर्वेद इस ऋतु में वात शांत करने के लिए पारंपरिक रूप से अश्वगंधा, बला, विदारी और दशमूल का उपयोग करता है। आपके लिए कौन सी सही है, चिकित्सक से पूछें।
आज यह करके देखें
आज रात पैरों के तलवों पर गुनगुना तिल का तेल मलें और सोने से पहले एक कप गर्म मसाला दूध पिएँ।
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