मुँह की बदबू? इन सरल आयुर्वेदिक उपायों से अंदरूनी तौर पर ठीक करें
अंग्रेज़ी में
मुँह की बदबू अक्सर पेट से शुरू होती है
केवल ब्रश करने से हमेशा मुँह की बदबू ठीक नहीं होती। आयुर्वेद कहता है कि यह अक्सर कमज़ोर पाचन का संकेत है। जब भोजन ठीक से नहीं पचता, तो वह सड़ने लगता है और आम (विषैले तत्व) बनाता है, जिसकी गंध खराब होती है।
शीशे वाली जाँच
शीशे के सामने खड़े होकर जीभ बाहर निकालें। जीभ के पिछले हिस्से पर मोटी परत आम का संकेत है, और अक्सर मुँह की बदबू का कारण भी।
लक्ष्य है पाचन अग्नि को मज़बूत करना ताकि वह आम को जला दे।
भोजन में बदलाव
- भारी भोजन से बचें।
- ठंडे पेय, आइसक्रीम, चीज़ और दही कम करें, ये पाचन धीमा करते हैं।
- गर्म, ताज़ा पका, हल्का भोजन लें।
रसोई के उपाय
1. भुनी सौंफ़ और जीरे का मुखवास
दोपहर और रात के खाने के बाद 1 चम्मच भुनी सौंफ़ और जीरा आधा-आधा मिलाकर चबाएँ। यह पाचन में मदद करता है और साँस को प्राकृतिक रूप से ताज़ा करता है।
2. इलायची चबाएँ
1 या 2 इलायची के दाने धीरे-धीरे चबाएँ। इलायची पाचन में मदद करती है और तुरंत ताज़गी देती है।
3. भोजन के बाद जीरा-धनिया-सौंफ़ की चाय
एक कप गर्म पानी में ¼ से ½ चम्मच जीरा, धनिया और सौंफ़ भिगोएँ। भोजन के बाद पिएँ।
आयुर्वेदिक तरीके से मुँह की देखभाल
- हर सुबह स्टील की जीभी से जीभ साफ़ करें।
- भोजन के बाद नीम या हर्बल टूथपेस्ट से ब्रश करें, और रोज़ फ़्लॉस करें।
- ऑयल पुलिंग (गंडूष): एक चम्मच तिल या नारियल का तेल कुछ मिनट मुँह में घुमाएँ, फिर थूक दें।
- मसूड़ों की मालिश: थोड़े नारियल तेल में मिला नीम का तेल लेकर मसूड़ों की हल्की मालिश करें। थूक दें, कभी निगलें नहीं।
योग और प्राणायाम
- सिंहासन: मुँह पूरा खोलें, जीभ बाहर निकालें और "हा" की आवाज़ के साथ साँस छोड़ें।
- योग मुद्रा और हल्के आगे झुकने वाले आसन
- शीतली (ठंडक देने वाली साँस)
डॉक्टर या दाँतों के डॉक्टर को कब दिखाएँ
अगर मुँह की अच्छी सफ़ाई के बाद भी बदबू बनी रहे, तो दाँतों के डॉक्टर या डॉक्टर को दिखाएँ। मुँह की बदबू कभी-कभी मसूड़ों की बीमारी, दाँतों में सड़न, साइनस संक्रमण, एसिड रिफ़्लक्स, डायबिटीज़ या अन्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है जिनका सही इलाज ज़रूरी है।
आज यह करके देखें
भुनी सौंफ़ और जीरे का एक छोटा डिब्बा बनाकर खाने की मेज़ पर रखें। हर भोजन के बाद एक चम्मच चबाएँ।
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