आपके दोष के लिए सर्वश्रेष्ठ योगासन: वात, पित्त और कफ की जानकारी
In English
हर दोष का शरीर में एक घर है
आयुर्वेद कहता है कि हर दोष का शरीर में एक मुख्य स्थान होता है। उस हिस्से को खींचने और खोलने वाले योगासन उस दोष को फिर से संतुलन में लाने में मदद करते हैं।
- वात: श्रोणि (पेल्विस) और पेट का निचला हिस्सा
- पित्त: सोलर प्लेक्सस (पेट का बीच का हिस्सा, नाभि के आसपास)
- कफ: सीना और फेफड़े
वात के लिए योग: स्थिरता और शांति
श्रोणि और कमर के निचले हिस्से को खींचने वाले आसन वात को शांत करते हैं:
- पश्चिमोत्तानासन (बैठकर आगे झुकना)
- अर्ध मत्स्येंद्रासन (रीढ़ का मोड़)
- मार्जरी-बिटिलासन (कैट-काउ)
- भुजंगासन (कोबरा)
- शलभासन (टिड्डी)
- उष्ट्रासन (ऊँट)
- पैर उठाना (पीठ के बल लेटकर)
- सूर्य नमस्कार, धीरे-धीरे
साँस: नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम) के 12 चक्र।
शैली: धीमी और स्थिर। आसनों को सहजता से थामें और लंबे शवासन से अभ्यास समाप्त करें।
पित्त के लिए योग: ठंडक और आराम
नाभि के आसपास खिंचाव देने वाले आसन पित्त को शांत करते हैं:
- मत्स्यासन (मछली)
- नौकासन (नाव)
- उष्ट्रासन (ऊँट)
- शलभासन (टिड्डी)
- धनुरासन (धनुष)
- चंद्र नमस्कार (चंद्र अभिवादन)
इनसे बचें: आयुर्वेद पित्त प्रकृति वालों को शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन और अन्य उल्टे आसनों से बचने की सलाह देता है, क्योंकि इनसे सिर में गर्मी बढ़ती है।
साँस: शीतली (जीभ को मोड़कर ठंडी साँस लेना)। अगर आप जीभ नहीं मोड़ सकते, तो शीतकारी (दाँतों के बीच से साँस लेना) करें।
शैली: सहज, बिना होड़ के, ठंडे कमरे में अभ्यास करें। दोपहर की गर्मी में अभ्यास न करें।
कफ के लिए योग: ऊर्जा और खुलापन
सीना और फेफड़े खोलने वाले आसन कफ को शांत करते हैं:
- सूर्य नमस्कार, तेज़ गति से
- सेतुबंधासन (सेतु)
- शलभासन (टिड्डी)
- ताड़ासन (ताड़ का पेड़)
- सिंहासन (जीभ बाहर निकालकर ज़ोर से "हा" कहते हुए साँस छोड़ना)
- सर्वांगासन और हलासन, केवल अनुभवी अभ्यासी शिक्षक के साथ करें
साँस: भस्त्रिका (धौंकनी जैसी साँस) या कपालभाति। 15 से 20 साँसों के छोटे चक्रों से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
शैली: सक्रिय और शरीर को गर्माहट देने वाली। ज़्यादा हिलें-डुलें और कम आराम करें।
सबके लिए सुनहरे नियम
- नए आसन किसी योग्य योग शिक्षक से सीखें। तस्वीरें और लिखित निर्देश आपकी मुद्रा ठीक नहीं कर सकते।
- भोजन के 2 से 3 घंटे बाद, खाली पेट अभ्यास करें।
- किसी आसन को ज़बरदस्ती न करें। हल्का प्रयास और स्थिर साँस ही सबसे ज़रूरी हैं।
- हर सत्र का अंत शवासन से करें, फिर प्राणायाम और ध्यान करें।
सुरक्षा सबसे पहले
- गर्दन या पीठ की समस्या, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या ग्लूकोमा होने पर, या गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान सर्वांगासन, हलासन और शीर्षासन न करें।
- उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मिर्गी या हर्निया होने पर, पेट की हाल ही में सर्जरी हुई हो, या आप गर्भवती हों, तो भस्त्रिका और कपालभाति न करें।
- दर्द, चक्कर या साँस फूलने पर अभ्यास रोक दें।
आज आज़माएँ
अपने दोष के लिए 3 आसन चुनें, हर आसन में 5 धीमी साँसों तक रुकें और 5 मिनट के शवासन से अभ्यास समाप्त करें।
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