मूत्राशय से रिसाव (मूत्र असंयम): नियंत्रण वापस पाने के सौम्य आयुर्वेदिक तरीके
अंग्रेज़ी में
एक आम समस्या, जिसकी बात कम होती है
खाँसने, छींकने, हँसने, वज़न उठाने या व्यायाम के समय थोड़ा पेशाब निकल जाना, या अचानक ऐसी ज़रूरत लगना जिसे रोक न पाएँ, बहुत आम है। यह महिलाओं में ज़्यादा होता है, ख़ासकर प्रसव के बाद और रजोनिवृत्ति के आसपास, पर पुरुषों को भी होता है। शर्माने की ज़रूरत नहीं है। अक्सर इसमें सुधार हो सकता है।
आयुर्वेद पेशाब पर नियंत्रण न रहने को मुख्य रूप से वात विकार मानता है, जो कमज़ोर मूत्राशय और पेल्विक मांसपेशियों से होता है।
कदम 1: पेल्विक मांसपेशियाँ मज़बूत करें
अश्विनी मुद्रा / पेल्विक फ़्लोर व्यायाम
- आराम से बैठें।
- गुदा के आसपास की और पेशाब रोकने वाली मांसपेशियों को हल्के से सिकोड़ें और ऊपर खींचें।
- 3 से 5 सेकंड रोकें, फिर पूरी तरह ढीला छोड़ें।
- दिन में 2 या 3 बार, 10 से 12 बार करें।
यह डॉक्टरों द्वारा बताए जाने वाले कीगल व्यायाम जैसा ही है। नियमित अभ्यास से आमतौर पर कुछ हफ़्तों में फ़र्क दिखता है।
पेशाब बीच में रोककर अभ्यास न करें। मूत्राशय खाली होने पर करें।
मददगार योगासन
- वज्रासन (एड़ियों पर बैठना)
- हल्के आगे झुकने वाले आसन
- सेतुबंधासन (ब्रिज पोज़)
कदम 2: मूत्राशय को प्रशिक्षित करें
कुछ लोग हर बार शौचालय देखते ही "शायद बाद में मौका न मिले" सोचकर चले जाते हैं। धीरे-धीरे मूत्राशय कम पेशाब रोकने का आदी हो जाता है। इसके बजाय:
- नियमित समय पर जाने की कोशिश करें, जैसे हर 2 से 3 घंटे में।
- ज़रूरत लगे तो कुछ मिनट रुकें और धीरे-धीरे अंतर बढ़ाएँ।
कदम 3: खान-पान
- चाय, कॉफ़ी, कोला और शराब कम करें। इनसे पेशाब बार-बार आता है और जल्दबाज़ी बढ़ती है।
- पानी पीना बंद न करें। कम पानी से पेशाब गाढ़ा होता है और मूत्राशय में जलन होती है। बस पानी दिन भर में बाँटकर पिएँ और सोने से 2 घंटे पहले कम पिएँ।
- गर्म, वात शांत करने वाला भोजन लें और कब्ज़ से बचें, क्योंकि उससे मूत्राशय पर दबाव पड़ता है।
- रोज़ थोड़े से गुड़ के साथ मुट्ठी भर सफ़ेद तिल खाएँ। आयुर्वेद इसे मूत्राशय मज़बूत करने के लिए उपयोग करता है। डायबिटीज़ हो तो गुड़ न लें।
- स्वस्थ वज़न रखें, इससे मूत्राशय पर दबाव कम होता है।
जड़ी-बूटियों के बारे में
आयुर्वेदिक चिकित्सक अश्वगंधा, बला और विदारी जैसी बल देने वाली जड़ी-बूटियाँ दे सकते हैं। इन्हें केवल सलाह से लें।
डॉक्टर को कब दिखाएँ
- जलन, दर्द, या तेज़ गंध वाला या धुँधला पेशाब (मूत्र संक्रमण हो सकता है)
- पेशाब में खून
- पेशाब का रिसाव अचानक शुरू हो, साथ में कमर दर्द, पैरों में कमज़ोरी या गुप्तांगों के आसपास सुन्नपन। यह आपातकाल है।
- पुरुषों में कमज़ोर धार, बूँद-बूँद टपकना या रात में बार-बार उठना (प्रोस्टेट की जाँच कराएँ)
- रिसाव से रोज़मर्रा का जीवन प्रभावित हो, या प्रसव के महीनों बाद भी जारी रहे। डॉक्टर या पेल्विक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट बहुत मदद कर सकते हैं।
आज यह करके देखें
डेस्क पर बैठे या टीवी देखते हुए 10 बार हल्के पेल्विक संकुचन करें। किसी को पता भी नहीं चलेगा।
सफ़ेद तिल, ऑर्गेनिक गुड़ और अश्वगंधा पाएँ: www.wildforaherbs.com
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