अपनी प्रकृति के अनुसार भोजन: वात, पित्त और कफ के लिए सरल आयुर्वेदिक आहार मार्गदर्शिका
अंग्रेज़ी में
एक ही आहार सबके लिए नहीं
हो सकता है आपके दोस्त का वज़न सलाद खाकर घट जाए, पर आपको वही खाकर पेट फूलना और ठंड महसूस हो। आयुर्वेद इसका कारण बताता है: सही भोजन आपकी प्रकृति पर निर्भर करता है। भोजन भारी या हल्का, चिकना या सूखा, गर्म या ठंडा होता है, और हर गुण हर दोष पर अलग असर डालता है।
इसे मार्गदर्शन मानें, कठोर नियम नहीं
- जो भोजन आपके दोष को सूट करता है, वह संतुलन लाता है। जो सूट नहीं करता, वह असंतुलन बढ़ा सकता है।
- अगर कोई भोजन आपके लिए आदर्श नहीं है, तो उसे पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी नहीं। उसे कम बार, कम मात्रा में खाएँ, या ऐसे पकाएँ कि उसका असर संतुलित हो जाए।
- उदाहरण: कच्चा सेब वात बढ़ा सकता है, पर थोड़े घी, दालचीनी या इलायची के साथ पका सेब वात के लिए अच्छा है।
प्रकृति के अनुसार आपकी थाली
वात की थाली (गर्म, नम, स्थिरता देने वाली)
- लगभग 50% साबुत अनाज: पके चावल, गेहूँ, ओट्स, दलिया
- लगभग 20% प्रोटीन: दूध-दही, उड़द और मसूर दाल, अंडे अगर खाते हैं
- 20 से 30% पकी सब्ज़ियाँ, थोड़े मीठे फल
- ज़्यादा लें: गर्म, पका, घी वाला थोड़ा चिकना भोजन
- कम लें: कच्चा सलाद, सूखे स्नैक्स, ठंडा भोजन और पेय
पित्त की थाली (ठंडी, शांत, कम मसालेदार)
- लगभग 50% साबुत अनाज: चावल, गेहूँ, जौ
- लगभग 20% प्रोटीन: मूँग दाल, चना, पनीर, दूध
- 20 से 30% सब्ज़ियाँ, मीठे रसीले फल
- ज़्यादा लें: ठंडक देने वाला, हल्के मसाले वाला, ताज़ा भोजन
- कम लें: मिर्च, बहुत खट्टा, नमकीन, तला और खमीर वाला भोजन
कफ की थाली (हल्की, गर्म, सूखी)
- 30 से 40% हल्के अनाज: बाजरा, ज्वार जैसे मोटे अनाज, जौ, थोड़ा चावल
- लगभग 20% प्रोटीन: ज़्यादातर दालें और फलियाँ, जैसे मूँग, मसूर, चना
- 40 से 50% सब्ज़ियाँ, खासकर हरी पत्तेदार। कफ के लिए रोज़ सलाद ठीक है।
- ज़्यादा लें: हल्का, गर्म, अच्छे मसाले वाला भोजन
- कम लें: भारी डेयरी, मिठाई, तला भोजन, ठंडे पेय
ऋतुओं का ध्यान रखें
- गर्मी: सब लोग, खासकर पित्त, तीखा-मसालेदार भोजन कम करें।
- शरद: सब लोग, खासकर वात, सूखा, ठंडा और कच्चा भोजन न लें।
- सर्दी और शुरुआती वसंत: सब लोग, खासकर कफ, आइसक्रीम, ठंडे पेय, दही और भारी चीज़ से बचें।
मिश्रित प्रकृति?
बहुत लोगों की प्रकृति मिली-जुली होती है, जैसे वात-पित्त। आसान नियम: जिस दोष की ऋतु चल रही हो, उसी का मार्गदर्शन अपनाएँ। जैसे शरद में वात संतुलित करने वाला और गर्मी में पित्त संतुलित करने वाला भोजन।
आज यह करके देखें
अपनी दोपहर की थाली देखें। क्या यह आपकी प्रकृति से मेल खाती है? एक छोटा बदलाव करें, जैसे वात के लिए कच्चे सलाद की जगह पकी सब्ज़ी, या पित्त के लिए कम मिर्च।
शुद्ध मसालों और घी के साथ अपनी प्रकृति के अनुसार पकाएँ: www.wildforaherbs.com
0 टिप्पणी