मासिक धर्म का दर्द (पीरियड्स की ऐंठन): अपना प्रकार जानें और प्राकृतिक राहत पाएँ
अंग्रेज़ी में
पीरियड्स का दर्द आम है, पर सहते रहना ज़रूरी नहीं
बहुत-सी महिलाओं को पीरियड्स में ऐंठन, पेट फूलना और असुविधा होती है। आयुर्वेद के अनुसार, पीरियड्स की समस्याएँ तीन प्रकार की होती हैं, और आपका प्रकार आपकी शारीरिक प्रकृति से अलग भी हो सकता है। इसकी पहचान करने से सही देखभाल चुनने में मदद मिलती है।
आपका प्रकार कौन-सा है?
वात प्रकार
- दर्द पीरियड्स से पहले या शुरुआत में ज़्यादा होता है
- तेज़ ऐंठन, पेट के निचले हिस्से और कमर के निचले हिस्से में दर्द
- पेट फूलना, कब्ज़, चिंता और ठीक से नींद न आना
- कम रक्तस्राव
पित्त प्रकार
- ज़्यादा रक्तस्राव, गर्मी महसूस होना
- स्तनों में दर्द, पेशाब करते समय जलन
- चिड़चिड़ापन और गुस्सा
कफ प्रकार
- पीरियड्स के आख़िरी दिनों में दर्द ज़्यादा होता है
- भारीपन, शरीर में पानी रुकना और पेट फूलना
- सफ़ेद स्राव, सुस्ती और दिन में सोने का मन होना
हर प्रकार के लिए राहत
वात की ऐंठन के लिए
- पेट के निचले हिस्से पर गुनगुने अरंडी या तिल के तेल से हल्की मालिश करें।
- पेट या कमर पर गर्म पानी की थैली रखें।
- गुनगुनी अदरक की चाय की चुस्कियाँ लें।
- गर्म, नरम और पका हुआ भोजन खाएँ और पेट साफ़ रखें।
पित्त की तकलीफ़ के लिए
- पेट के निचले हिस्से पर नारियल का तेल लगाएँ। इससे आराम और ठंडक मिलती है।
- थोड़ी मिश्री के साथ नारियल पानी पिएँ।
- पीरियड्स से पहले और दौरान मसालेदार, खट्टा और तला हुआ भोजन न खाएँ।
कफ के भारीपन के लिए
- पेट के निचले हिस्से पर सरसों और अरंडी का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर मालिश करें।
- अदरक और काली मिर्च वाला हल्का, गर्म भोजन लें।
- दिन में सोने की बजाय हल्का टहलना ज़्यादा मददगार है।
सबके लिए उपाय
- भुना जीरा: जीरे को खुशबू आने तक सूखा भूनें, ठंडा करें और 1 छोटा चम्मच धीरे-धीरे चबाएँ।
- अजवाइन का पानी: ½ छोटा चम्मच अजवाइन को एक कप पानी में उबालें, छानें और गुनगुना पिएँ।
- आराम करें: आयुर्वेद के अनुसार, पीरियड्स के दौरान कठिन योग या व्यायाम न करें। आराम करें, पढ़ें और तनावमुक्त रहें।
- महीने के बाकी दिनों में, समस्याओं से बचने के लिए अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार खान-पान और योग अपनाएँ।
ज़्यादा रक्तस्राव के लिए
- थोड़ी मिश्री के साथ नारियल पानी
- गुड़हल की चाय का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है
- खून की कमी से बचने के लिए खजूर, गुड़, अनार और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों जैसे आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएँ
हर्बल फ़ॉर्मूलों के बारे में
आयुर्वेदिक डॉक्टर मासिक धर्म की अलग-अलग समस्याओं के लिए अश्वगंधा, शतावरी, अशोक और लोध्र जैसी जड़ी-बूटियों और गुग्गुलु के फ़ॉर्मूलों का उपयोग करते हैं। इन्हें किसी योग्य चिकित्सक की सलाह से ही लें। गर्भवती होने की संभावना हो तो जड़ी-बूटियाँ न लें।
इन स्थितियों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें
- दर्द बहुत तेज़ हो, रोज़मर्रा के काम रोक दे या हर महीने बढ़ता जाए
- रक्तस्राव बहुत ज़्यादा हो (हर घंटे पैड भीग जाए या बड़े थक्के निकलें)
- दो पीरियड्स के बीच या यौन संबंध के बाद रक्तस्राव हो
- पीरियड्स बहुत अनियमित हों या न आएँ, या गर्भवती होने की संभावना हो
- चक्कर, कमज़ोरी या साँस फूलना महसूस हो (खून की कमी हो सकती है)
- दर्द के साथ बुखार या असामान्य स्राव हो
पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, फ़ाइब्रॉइड और थायरॉइड की समस्याओं की सही जाँच ज़रूरी है।
आज ही यह आज़माएँ
अगले पीरियड्स के लिए गर्म पानी की थैली, अरंडी का तेल और भुने जीरे का एक डिब्बा तैयार रखें।
अरंडी का तेल, अजवाइन, जीरा, शतावरी और गुड़हल यहाँ पाएँ: www.wildforaherbs.com
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