सात्त्विक, राजसिक और तामसिक भोजन: आप जो खाते हैं वह आपके मन को कैसे आकार देता है
अंग्रेज़ी में
भोजन मन को भी पोषण देता है
आयुर्वेद सिखाता है कि भोजन सिर्फ़ शरीर को पोषण नहीं देता। यह आपके विचारों, मनोदशा और व्यवहार को भी आकार देता है। जैसे शरीर में तीन दोष हैं, वैसे ही मन के तीन गुण हैं: सत्त्व, रजस और तमस।
मन के तीन गुण
सत्त्व: स्पष्टता और शांति
सत्त्व स्पष्टता, शांति, दया और ज्ञान देता है। सात्त्विक मन प्रेमपूर्ण, धैर्यवान और सकारात्मक होता है, और जल्दी परेशान नहीं होता। यही गुण हमें हर सुबह ताज़गी से जगाता है।
रजस: क्रिया और ऊर्जा
रजस गति, महत्वाकांक्षा और ऊर्जा देता है। काम और रचना के लिए यह ज़रूरी है। पर ज़्यादा रजस मन को बेचैन, प्रतिस्पर्धी, गुस्सैल और तनावग्रस्त बनाता है।
तमस: विश्राम और भारीपन
तमस स्थिरता, भारीपन और नींद देता है। तमस के बिना हम रात को सो नहीं सकते। पर ज़्यादा तमस हमें सुस्त, आलसी, उदास और ढीला बनाता है।
हम सब में तीनों गुण हैं। स्वास्थ्य और खुशी तब आती है जब सत्त्व ज़्यादा हो, काम के लिए पर्याप्त रजस हो, और आराम के लिए पर्याप्त तमस हो।
तीन प्रकार का भोजन
सात्त्विक भोजन: स्पष्ट, शांत मन के लिए
हल्का, ताज़ा, प्राकृतिक और आसानी से पचने वाला।
- ताज़े फल और भाप में पकी सब्ज़ियाँ
- ताज़ी सब्ज़ियों का रस
- साबुत अनाज, मूँग दाल
- दूध और घी, जिनके बारे में आयुर्वेद कहता है कि ये ओज (जीवन शक्ति) बढ़ाते हैं
- ताज़ा पका, घर का बना भोजन
असर: स्पष्टता, प्रेम, करुणा, धैर्य और क्षमा।
राजसिक भोजन: क्रिया के लिए, पर ज़्यादा हो तो बेचैनी
गर्म, तीखा, नमकीन और ललचाने वाला।
- बहुत तीखी सब्ज़ियाँ, तीखे अचार और चटनियाँ
- नमकीन स्नैक्स, चिप्स और नमकीन (जिन्हें "एक खाकर रुक नहीं सकते")
- बहुत ज़्यादा चाय, कॉफ़ी और उत्तेजक चीज़ें
ज़्यादा होने पर असर: बेचैनी, गुस्सा, अधीरता और लालसा।
तामसिक भोजन: भारी और सुस्त करने वाला
भारी, पुराना और कठिनाई से पचने वाला।
- बासी, बचा हुआ या बार-बार गर्म किया भोजन
- बहुत भारी, गाढ़ा चीज़ और डीप-फ्राई भोजन
- भारी लाल मांस
- किसी भी चीज़ को ज़रूरत से ज़्यादा खाना
ज़्यादा होने पर असर: भारीपन, आलस, उदासी और बहुत ज़्यादा नींद।
संतुलित नज़रिया
तामसिक भोजन हमेशा बुरा नहीं है। थोड़ा भारी, स्थिरता देने वाला भोजन उस व्यक्ति की मदद कर सकता है जो बहुत बेचैन, बिखरा हुआ हो या सो न पा रहा हो। आयुर्वेद में हर चीज़ की तरह यहाँ भी बात संतुलन और सही मात्रा की है।
गुण और दोष
- वात में रजस (गति) ज़्यादा है, और इसका सत्त्व स्पष्टता और हल्केपन के रूप में दिखता है।
- पित्त में सत्त्व काफ़ी है, जो ज्ञान और समझ के रूप में दिखता है, साथ में रजस भी।
- कफ में तमस (स्थिरता) ज़्यादा है, और इसका सत्त्व प्रेम और क्षमा के रूप में दिखता है।
आज यह करके देखें
आज एक भोजन पूरी तरह सात्त्विक बनाएँ: ताज़ी पकी मूँग दाल, चावल, भाप में पकी एक सब्ज़ी और एक चम्मच घी। फिर देखें कि आप कितना हल्का और स्पष्ट महसूस करते हैं।
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