मोच और खिंचाव: मुड़े हुए टखनों और खिंची हुई मांसपेशियों के लिए आयुर्वेदिक प्राथमिक उपचार
अंग्रेज़ी में
मोच या खिंचाव: क्या अंतर है?
फ़ुटपाथ से गलत कदम, ऊँची एड़ी में फिसलना, या फैले हाथ पर गिरना, ये सब जोड़ को अचानक मोड़ सकते हैं।
- मोच (पित्त): लिगामेंट में चोट, साथ में दर्द, सूजन और नीला-काला निशान
- खिंचाव (वात): मांसपेशी में चोट, साथ में दर्द और अकड़न, पर आमतौर पर नीला निशान नहीं
कदम 1: पहले 48 घंटे: आराम, ठंडक, सहारा, ऊँचा रखना
- आराम: गतिविधि रोकें और चोट वाले हिस्से पर वज़न न डालें।
- ठंडक: हर 2 से 3 घंटे में 15 से 20 मिनट के लिए कपड़े में लपेटा ठंडा पैक लगाएँ। पहले 2 दिन गर्म सेंक न करें।
- सहारा: जगह को इलास्टिक क्रेप पट्टी से मज़बूती से, पर ज़्यादा कसकर नहीं, बाँधें।
- ऊँचा रखें: सूजन कम करने के लिए चोट वाले अंग को तकियों पर दिल के स्तर से ऊपर रखें।
कदम 2: ठंडक वाला हल्दी-नमक का लेप
½ चम्मच हल्दी और ½ चम्मच नमक थोड़े ठंडे पानी में मिलाकर सूजी जगह पर लगाएँ। आयुर्वेद सूजन कम करने के लिए इसका उपयोग करता है।
ज़्यादा सूजन के बिना मांसपेशी के खिंचाव में, पहले 2 दिन के बाद, यही लेप वात शांत करने के लिए गुनगुना बनाकर लगाया जा सकता है।
फटी त्वचा पर लेप न लगाएँ।
कदम 3: ठीक करने वाले रस
ताज़ा अनानास या अनार का रस पिएँ। अनानास में एक प्राकृतिक एंज़ाइम (ब्रोमेलेन) होता है जिसे पारंपरिक रूप से सूजन कम करने से जोड़ा जाता है।
कदम 4: 48 घंटे बाद: हल्की गर्माहट
सूजन कम हो जाने पर:
- टखने या पैर को 15 मिनट 2 बड़े चम्मच नमक वाले गुनगुने पानी में डुबोएँ।
- ज़्यादा गर्माहट के लिए गुनगुने पानी में 2 छोटे चम्मच राई की कपड़े की पोटली डालें।
- आसपास की जगह पर महानारायण तेल से हल्की मालिश करें (बहुत दर्द हो तो चोट पर सीधे नहीं)।
- दर्द के अनुसार धीरे-धीरे हिलाना-डुलाना शुरू करें।
बचाव
- लंबी सैर के लिए ऊँची एड़ी के जूते न पहनें।
- व्यायाम से पहले वार्म-अप करें।
- ऊबड़-खाबड़ ज़मीन और सीढ़ियों पर ध्यान से चलें।
- योग से ताकत और संतुलन बढ़ाएँ (वृक्षासन और वीरभद्रासन)।
जड़ी-बूटियों के बारे में
आयुर्वेदिक डॉक्टर चोट जल्दी भरने के लिए कैशोर गुग्गुलु या योगराज गुग्गुलु दे सकते हैं। इन्हें केवल सलाह से ही लें।
डॉक्टर को दिखाएँ अगर
- पैर पर बिल्कुल भी वज़न न डाल पाएँ या हाथ का उपयोग न कर पाएँ
- जोड़ टेढ़ा दिखे या चटकने या टूटने की आवाज़ आई हो
- बहुत ज़्यादा सूजन, सुन्नपन, झनझनाहट हो, या जगह पीली या नीली पड़ जाए
- दर्द बहुत तेज़ हो, या 3 से 5 दिन में सुधार न हो
- घायल व्यक्ति बुज़ुर्ग हो या उसे ऑस्टियोपोरोसिस हो (फ़्रैक्चर हो सकता है)
आज यह करके देखें
घर के फ़र्स्ट-एड बॉक्स में इलास्टिक पट्टी, ठंडा पैक और हल्दी रखें।
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