आयुर्वेद के 6 रस: हर भोजन में मीठे, खट्टे, नमकीन, कड़वे, तीखे और कसैले रस क्यों ज़रूरी हैं
अंग्रेज़ी में
स्वाद सिर्फ़ ज़ायका नहीं
आयुर्वेद में स्वाद (रस) ही औषधि है। जब भोजन जीभ को छूता है, तो वह दिमाग को संदेश भेजता है जो पाचन, दोषों और पूरे शरीर पर असर डालता है। आयुर्वेद छह रस बताता है, हर रस पाँच तत्वों में से दो से बना है।
छह रस एक नज़र में
- मधुर (मीठा) = पृथ्वी + जल
- अम्ल (खट्टा) = पृथ्वी + अग्नि
- लवण (नमकीन) = जल + अग्नि
- कटु (तीखा) = अग्नि + वायु
- तिक्त (कड़वा) = वायु + आकाश
- कषाय (कसैला) = वायु + पृथ्वी
1. मधुर (मीठा)
कहाँ मिलता है: चावल, गेहूँ, दूध, घी, खजूर, गुड़, मीठे फल
संतुलन में: ताकत देता है, सभी धातुओं को पोषण देता है, त्वचा में चमक, स्वस्थ बाल और मधुर आवाज़ में मदद करता है, और प्यास व जलन शांत करता है।
ज़्यादा होने पर: वज़न बढ़ना, ज़ुकाम, बलगम, भारीपन, आलस और ब्लड शुगर की समस्याएँ।
2. अम्ल (खट्टा)
कहाँ मिलता है: नींबू, दही, इमली, सिरका, खमीर वाले भोजन, हरे अंगूर
संतुलन में: ताज़गी देता है, भूख और पाचन बढ़ाता है, शरीर को ऊर्जा देता है।
ज़्यादा होने पर: एसिडिटी, सीने में जलन, दाँतों में झनझनाहट और मुँहासे जैसी त्वचा की समस्याएँ।
3. लवण (नमकीन)
कहाँ मिलता है: समुद्री नमक, सेंधा नमक, समुद्री शैवाल
संतुलन में: स्वाद बढ़ाता है, पाचन में मदद करता है और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखता है।
ज़्यादा होने पर: हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी रुकना, त्वचा की समस्याएँ और जल्दी झुर्रियाँ।
4. कटु (तीखा)
कहाँ मिलता है: मिर्च, काली मिर्च, अदरक, लहसुन, प्याज़, सरसों, मूली
संतुलन में: पाचन अग्नि तेज़ करता है, साइनस खोलता है, रक्त संचार बढ़ाता है और मन को स्पष्टता देता है।
ज़्यादा होने पर: जलन, एसिडिटी, सीने में जलन, दस्त, चक्कर और खराब नींद।
5. तिक्त (कड़वा)
कहाँ मिलता है: करेला, मेथी, नीम, हल्दी, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, एलोवेरा
संतुलन में: शरीर को शुद्ध करता है, गर्मी शांत करता है, खुजली और त्वचा की समस्याओं में राहत देता है, और पाचन टॉनिक का काम करता है। यह वह स्वाद है जो हम में से ज़्यादातर लोग बहुत कम खाते हैं।
ज़्यादा होने पर: रूखापन, वज़न घटना और थकान।
6. कषाय (कसैला)
कहाँ मिलता है: अनार, कच्चा केला, चना, मूँग, भिंडी, हरी फलियाँ, हल्दी
संतुलन में: पित्त को ठंडा करता है, अतिरिक्त कफ सुखाता है और घाव भरने में मदद करता है।
ज़्यादा होने पर: मुँह सूखना, कब्ज़, गैस और अकड़न।
संतुलित भोजन का रहस्य
पारंपरिक भारतीय थाली में स्वाभाविक रूप से छहों रस होते हैं: चावल (मीठा), नींबू या अचार (खट्टा), नमक, मसालेदार सब्ज़ी (तीखा), मेथी या करेला (कड़वा) और दाल (कसैला)। इसीलिए यह बिना किसी लालसा के पूरा संतोष देती है।
आज यह करके देखें
रात के खाने में अपनी थाली देखें। क्या कोई रस गायब है? अक्सर कड़वा रस गायब होता है, तो थोड़ी मेथी, करेला या हरी पत्तेदार सब्ज़ी जोड़ें।
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