आयुर्वेदिक तरीके से बिताएं सर्दी और बसंत: सर्दी, खांसी और भारीपन को दूर भगाएं

Winter and Spring the Ayurvedic Way: Beat Colds, Cough and Heaviness

आयुर्वेदिक तरीके से सर्दी और वसंत का सामना करें: ज़ुकाम, खाँसी और भारीपन को दूर भगाएँ

अंग्रेज़ी में

कफ की ऋतुएँ

सर्दी ठंडी, बादलों वाली, नम और भारी होती है। जीवन धीमा हो जाता है। वसंत में गर्मी आने से सर्दी में जमा कफ पिघलने लगता है, जैसे पहाड़ों पर बर्फ़ पिघलती है। इसीलिए शुरुआती वसंत में बहुत लोगों को ज़ुकाम, खाँसी, साइनस और एलर्जी होती है।

मुख्य नियम: गर्म रहें, सक्रिय रहें, हल्का खाएँ।

सर्दी के लिए मार्गदर्शन

सर्दी की सुबह

  • कड़ाके की सर्दी में बहुत जल्दी उठना ज़रूरी नहीं। जब तक काम के लिए जल्दी न उठना हो, लगभग 7 बजे ठीक है।
  • ऐसे योग करें जो छाती खोलें: सूर्य नमस्कार, मत्स्यासन, शलभासन, नौकासन, धनुरासन, सिंहासन और उष्ट्रासन।
  • कफ साफ़ करने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम करें, फिर शांत ध्यान।
  • गुनगुने तिल के तेल से मालिश करें और गर्म पानी से नहाएँ। सर्दी में तिल का तेल सभी प्रकृतियों को सूट करता है।

सर्दी का भोजन

  • नाश्ता: ओट्स, जौ का सूप, खिचड़ी या पोहा
  • दोपहर: गेहूँ की रोटी, भाप में पकी सब्ज़ियाँ और घी वाला गर्म सूप
  • सर्दी में पाचन अग्नि तेज़ होती है, इसलिए यह पौष्टिक भोजन का मौसम है

सर्दी की गर्म चाय

एक कप पानी में ½ चम्मच सोंठ, ½ चम्मच दालचीनी और चुटकी भर लौंग 5 मिनट उबालें। यह शरीर को गर्म रखती है, रक्त संचार में मदद करती है और बलगम साफ़ करने में सहायक है।

अल्सर या ज़्यादा एसिडिटी हो तो यह चाय न लें, यह बहुत गर्म है।

सर्दी में जीवनशैली

  • बाहर हमेशा सिर, गर्दन और कान ढकें। सिर से शरीर की बहुत गर्मी निकलती है।
  • लाल और नारंगी जैसे चमकीले, गर्म रंग पहनें।
  • सर्दी में दिन में न सोएँ; इससे पाचन धीमा होता है और कफ बढ़ता है।
  • धुंधले सर्द दिन अकेलापन और उदासी ला सकते हैं। अपनों के पास रहें और सक्रिय रहें।
  • रात को सिर और तलवों पर तिल का तेल मलें।
  • सर्दी की पारंपरिक जड़ी-बूटियाँ: अदरक, काली मिर्च, पिप्पली, मुलेठी और च्यवनप्राश।

वसंत के लिए मार्गदर्शन

ऋतुओं का राजा

वसंत उत्सव की ऋतु है: फूल खिलते हैं, ऊर्जा बढ़ती है और लोगों को बाहर रहना अच्छा लगता है। पर यह ज़ुकाम, परागज ज्वर और एलर्जी की ऋतु भी है, खासकर कफ लोगों के लिए।

वसंत का भोजन

ज़्यादा लें

  • कड़वा, तीखा और कसैला स्वाद
  • दालें: मसूर, चना, पीली मटर
  • मूली, पालक, भिंडी, प्याज़ और लहसुन
  • अदरक और काली मिर्च (वात और पित्त लोग तीखे मसाले ज़्यादा न लें)
  • गुनगुने (गर्म नहीं) पानी में एक चम्मच शहद कफ को संतुलित करता है

इनसे बचें

  • भारी, तैलीय, मीठा, खट्टा और नमकीन भोजन
  • डेयरी, खासकर सुबह
  • आइसक्रीम और ठंडे पेय
आयुर्वेद सुझाव: शहद को कभी पकाएँ या गर्म न करें। इसे केवल गुनगुने पानी या भोजन में मिलाएँ।

वसंत में जीवनशैली

  • सुबह जल्दी उठें और सैर पर जाएँ।
  • सूर्य नमस्कार और छाती खोलने वाले आसन करें।
  • भस्त्रिका प्राणायाम करें।
  • दिन में सोने से बचें।
  • भोजन के बाद जीरा-धनिया-सौंफ़ की चाय या अदरक, काली मिर्च और दालचीनी की चाय पिएँ।
  • वसंत की पारंपरिक जड़ी-बूटियाँ: अदरक, पिप्पली, पुनर्नवा और सितोपलादि।

जैसे-जैसे वसंत गर्म होता जाए, धीरे-धीरे गर्मी (पित्त) के नियम अपनाएँ।

आज यह करके देखें

सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद से करें, फिर 15 मिनट तेज़ चाल से टहलें।

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नोट: ये सुझाव सामान्य स्वास्थ्य के लिए हैं। एक साल से छोटे बच्चों को शहद न दें। किसी भी बीमारी में कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

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